प्रेम में प्रगाढ़ता की तालाश। आज के दौर में प्रेम की परिभाषा बदल गाई है, प्रेम को अब जाँच पराख कर अपनया जाता है। पर प्रेम का सवरुप वही है, ऐसे एक जीवन साथी की तलाश जिसे हम सबकुछ बातसके , जो हमे समझे , वेगहरा वेगहरा ।इन सब बातो का अगर मुल अर्थ समझाजाये तो याही निकलता है की हम अपने रिश्ते में गहराई चाहते । प्रेम का दौर कितना भी क्यों न बदल जाये मूलतः जरुरत नहीं बदलती , जैसे पानी नदी का हो या समुद्र का उस मूलतः हाइड्रोजन और ऑक्सीजन होता ही है, इन के बीना वाह पानी होना का सबूत पेश नहीं कहता पाता । वैसे ही प्रेम की सार्थकता महसुस करने के लिए उस में प्रगाढ़ता जरुरी है । किसी ने प्रेम का यही मर्म समजने के लिये एक गने में एक लाइन कही " तुझे पहली बार में मिलता हु हर दफ़ा " तो एक ने इस का तातपर्य निकल कर अपने साथी के साथ अजनबीयों जैसा बर्ताव करना शुरू कर दिया , जबकी यहाँ अर्थ विविध्ता से था. और नतीजा ये हुआ की उसे अपनी दोस्ती ...
Posts
Showing posts from December, 2018